अकेला आदमी / सत्यम तिवारी

सत्यम तिवारी की दो कविताएं

अकेला आदमी


धूप अविलंब खा जाती है उसकी परछाई बारिश चुपचाप मिटा देती है उसके पदचापों के निशान अकेला आदमी ख़ुद का पीछा करते हुए भी अकेला होता है

उसकी आत्मा के छालों पर भी दूसरों का अधिकार होता है अकेले आदमी की कल्पना में अनगिनत गड्ढ़े होते हैं वह मरुस्थल में मृगतृष्णा का पीछा करते नहीं मरता रेती के धँसने की प्रतीक्षा करता है

अपना ही हाथ अपने ही हाथ में लेकर अकेले रहने की प्रतिज्ञा करता है अकेले रहना भले ही उसकी मज़बूरी न हो अकेले रहने का चुनाव वह मज़बूरी में करता है

‘नदी’ में डूब जाने पर ‘द्वीप‘ नहीं तलाशता जीवन का कोई स्वप्न भूल नहीं पाता ‘अंधेरे में’ मौलिकता छानकर पी जाता है अकेला आदमी प्रेरित कविताएं नहीं लिखता वायुमंडलीय दाब महसूस करता उसका सर हवा में टकराता रहता है अपने अकेलेपन को जीवित रखने के सिवा उसके पास जीवित रहने की कोई वजह नहीं होती

अकेले आदमी का लैंप दिन भर जलता है रात भर जलती हुई मोमबत्ती सालती है उसे अकेला आदमी अंतस से बाह्य तक अर्थ से भाव तक सर से पाँव और शहर से गाँव तक अकेला होता है

उसके रौशनदान से सिर्फ़ आती है प्राणवायु जालीनुमा खिड़की से अनगिनत टुकड़ों में बँटता है सूरज रौशनी के लिए भी नहीं खुलता उसका दरवाजा अफ़सोस कि सभी का होने की चाहत में किसी ‘कवि’ की तरह वह टुकड़ों में बँटा और किसी का न हो सका

आद्र मन में संगीत की कोई लहर नहीं उठती प्रतीक्षारत आँखों में किसी का स्वप्न नहीं ठहरता अकेले आदमी को सिर्फ़ याद रहती है दम तोड़ती हुई किसी की पीली हँसी

ख़ुद से बाहर निकलना उसके लिए कब मुश्किल था हाशिए पर खदेड़े गए अकेले आदमी से अधिक सामाजिक दुनिया में कोई नहीं हो सकता

अकेला आदमी वह दुर्घटनाग्रस्त पुलिया है जिसपर एकसाथ चलने की मनाही होती है

अकेला आदमी वह निर्माणाधीन सड़क है जिसके आगे ‘दिशा-परिवर्तन’ का बोर्ड लगा है

शुरुआत में अकेला आदमी अकेला दिखाई नहीं देता तदोपरांत अकेला आदमी दिखाई नहीं देता कालांतर में अकेला आदमी गुलर का फूल हो जाता है


एक खाली गिलास की तरह है मेरा दिल

एक खाली गिलास की तरह है मेरा दिल जिसे जरूरत से अधिक प्यार किया गया तो यह हमारी आँखों की कोर से छलक पड़ेगा

एक टूटे गिलास की तरह है मेरा दिल जिसमें अपना प्रतिबिम्ब ढूँढ़ना भी तुम्हारे लिए अपशगुन है

एक प्लास्टिक के गिलास की तरह है मेरा दिल जिसे बची-खुची पत्तलों के साथ लोग इस्तेमाल के बाद जला देंगे

अदालतों की मेज़ों पर धड़कता रखा है मेरा दिल जिसे थोड़ा-थोड़ा सुड़क कर मुझे फैसला सुनाया जाएगा”


सत्यम तिवारी



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