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आकाश वापस लौट जाता है - जनमेजय की कविताएँ
क्षितिज पर एक खिड़की
बंद होने लगती है
वृक्ष की फुनगियों पर टिका
आकाश वापस लौट जाता है
लेकिन कोई दावा नहीं करता।
Jun 27


प्रभात की कविताओं से सजा संसार
प्रभात की कविताओं का आम आदमी इस देश का मध्यमवर्गीय और ग़रीब आदमी है। उसे भरे बाज़ार में घिसी चप्पलों का तकिया लगाकर नींद आ जाती है।
Feb 13


किसी भी नंबर से आ सकता है मुझे तुम्हारा फोन — केतन यादव की कविताएँ
तभी मेरे भ्रम ने मुझसे कहा
अब दुनिया के सभी नंबर तुम्हारे ही हैं
किसी भी नंबर से आ सकता है मुझे तुम्हारा फोन।
Sep 8, 2025
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