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किसी के दुःख में भीतर-ही-भीतर किसी को थामे रखना, यह मैंने पेड़ों से सीखा — सैफ़ अंसारी की कविताएँ
हमारे जीवन में कभी-कभी दुःख इतना हो जाता है कि हम दुःख शब्द के “ख” अक्षर के गोलाकार गर्भ में सिकुड़कर हो जाते हैं दुनिया से दूर
Jun 18, 2022
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